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Shayari SMS: share on facebook and twitter | TiKAG

Shayari

Masjid to hui haasil humko, khaali imaan ganwa baithe.
Mandir ko bachaya lad-bhidkar, khaali Bhagwan ganwa baithe.
Dharti ko humne naap liya, hum chaand sitaaron tak pahunche,
Kul kaaynaat ko jeet liya, khaali insaan ganwa baithe.
Mazhab ke thekedaaron ne aaj phir hamein yun bhadkaya,
Ke kaazi aur pandit zinda the, hum apni jaan ganwa baithe.
Sarhad jab-jab bhi bant-ti hai, dono nuksan uthate hain,
Hum Pakistan ganwa baithe, woh Hindustan ganwa baithe...

Woh is tarah mere gunaho ko dho deti hai
Bohot ghusse main ho to ro deti hai
Labon pe uske kabhi bad-dua nahi hoti hai
Bas ek 'Maa' hai jo mujhse kabhi khafa nahi hoti hai

Jo muskura raha hai, use dard ne paala hoga
Jo chal raha hai uske paanv mein zaroor chhala hoga
Bina sangharsh ke chamak nahi milti
Jo jal raha hai til-til, ussi diye mein ujala hoga...

Insaniyat dil mein hoti hai, haisiyat mein nahi
Uparwala karm dekhta hai vaseeyat nahi...

जाने क्यूं अब शर्म से,चेहरे गुलाब नही होते।
जाने क्यूं अब मस्त मौला मिजाज नही होते।

पहले बता दिया करते थे, दिल की बातें।
जाने क्यूं अब चेहरे, खुली किताब नही होते।

सुना है बिन कहे दिल की बात समझ लेते थे।
गले लगते ही दोस्त हालात समझ लेते थे।

तब ना फेस बुक ना स्मार्ट मोबाइल था ना फेसबुक
ना ट्विटर अकाउंट था एक चिट्टी से ही दिलों के जज्बात समझ लेते थे।

सोचता हूं हम कहां से कहां आ गये,
प्रेक्टीकली सोचते सोचते भावनाओं को खा गये।

अब भाई भाई से समस्या का समाधान कहां पूछता है
अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहां पूछता है
बेटी नही पूछती मां से गृहस्थी के सलीके
अब कौन गुरु के चरणों में बैठकर ज्ञान की परिभाषा सीखे।

परियों की बातें अब किसे भाती है
अपनो की याद अब किसे रुलाती है
अब कौन गरीब को सखा बताता है
अब कहां कृष्ण सुदामा को गले लगाता है

जिन्दगी मे हम प्रेक्टिकल हो गये है
मशीन बन गये है सब, इंसान जाने कहां खो गये है!
इंसान जाने कहां खो गये है.

ज़मीर ज़िंदा रख, 
कबीर ज़िंदा रख, 
सुल्तान भी बन जाए तो, 
दिल में फ़क़ीर ज़िंदा रख, 
हौसले के तरकश में, 
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख, 
हार जा चाहे जिन्दगी मे सब कुछ, 
मगर फिर से जीतने की वो उम्मीद जिन्दा रख, 
बहना हो तो बेशक बह जा, 
मगर सागर मे मिलने की वो चाह जिन्दा रख, 
मिटता हो तो आज मिट जा इंसान, 
मगर मिटने के बाद भी इंसानियत जिन्दा रख

आगे सफर था और पीछे हमसफर था..

रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..

 

 

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

 

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...

 

मुद्दत का सफर भी था और बरसो
 का हमसफर भी था

रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

 

यूँ समँझ लो,

प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...

 

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.

 

 

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

 

 

वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

 

 

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।। 
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।

 

 

"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!

 

 

"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, 

पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
 वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....

अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......

 

 

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली... 

बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...

पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम 

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।